المؤخر
كلمة (المؤخِّر) في اللغة اسم فاعل من التأخير، وهو نقيض التقديم،...
तो दायें वाले, तो क्या हैं दायें वाले![1]
फिरते होंगे उनकी सेवा के लिए बालक, जो सदा (बालक) रहेंगे।
प्याले तथा सुराह़ियाँ लेकर तथा मदिरा के छलकते प्याले।
नहीं सुनेंगे उनमें व्यर्थ बात और न पाप की बात।
और दायें वाले, क्या (ही भाग्यशाली) हैं दायें वाले!
वास्तव में, वे इससे पहले (संसार में) सम्पन्न (सुखी) थे।
तथा कहा करते थे कि क्या जब हम मर जायेंगे तथा हो जायेंगे धूल और अस्थियाँ, तो क्या हम अवश्य पुनः जीवित होंगे?
अवश्य एकत्र किये जायेंगे एक निर्धारित दिन के समय।
हमने ही उत्पन्न किया है तुम्हें, फिर तुम विश्वास क्यों नहीं करते?
क्या तुमने ये विचार किया कि जो वीर्य तुम (गर्भाशयों में) गिराते हो।
क्या तुम उसे शिशु बनाते हो या हम बनाने वाले हैं?
हमने निर्धारित किया है तुम्हारे बीच मरण को तथा हम विवश होने वाले नहीं हैं।
कि बदल दें तुम्हारे रूप और तुम्हें बना दें उस रूप में, जिसे तुम नहीं जानते।
तथा तुमने तो जान लिया है प्रथम उत्पत्ति को फिर तुम शिक्षा ग्रहण क्यों नहीं करते?
क्या तुम उसे उगाते हो या हम उसे उगाने वाले हैं?
यदि हम चाहें, तो उसे भुस बना दें, फिर तुम बातें बनाते रह जाओ।
क्या तुमने उसे बरसाया है बादल से अथवा हम उसे बरसाने वाले हैं।?
यदि हम चाहें, तो उसे खारी कर दें, फिर तुम आभारी (कृतज्ञ) क्यों नहीं होते?
क्या तुमने उत्पन्न किया है उसके वृक्ष को या हम उत्पन्न करने वाले हैं?
हमने ही बनाया उसे शिक्षाप्रद तथा यात्रियों के लाभदायक।
अतः, (हे नबी!) आप पवित्रता का वर्णन करें अपने महा पालनहार के नाम की।
फिर क्या तुम इस वाणि (क़ुर्आन) की अपेक्षा करते हो?
तथा हम अधिक समीप होते हैं उसके तुमसे, परन्तु तुम नहीं देख सकते।
तो उस (प्राण) को फेर क्यों नहीं लाते, यदि तुम सच्चे हो?
तो उसके लिए सुख तथा उत्तम जीविका तथा सुख भरा स्वर्ग है।
और यदि वह है झुठलाने वाले कुपथों में से।
अतः, (हे नबी!) आप पवित्रता का वर्णन करें अपने महा पालनहार के नाम की।