الإله
(الإله) اسمٌ من أسماء الله تعالى؛ يعني استحقاقَه جل وعلا...
वे आपस में किस विषय में प्रश्न कर रहे हैं?
जिस दिन सूर में फूँका जायेगा। फिर तुम दलों ही दलों में चले आओगे।
और आकाश खोल दिया जायेगा, तो उसमें द्वार ही द्वार हो जायेंगे।
और पर्वत चला दिये जायेंगे, तो वे मरिचिका बन जायेंगे।[1]
तो चखो, हम तुम्हारी यातना अधिक ही करते रहेंगे।[1]
जो आकाश, धरती तथा जो उनके बीच है, सबका अति करुणामय पालनहार है। जिससे बात करने का वे साहस नहीं कर सकेंगे।
जिस दिन रूह़ (जिब्रील) तथा फ़रिश्ते पंक्तियों में खड़े होंगे, वही बात कर सकेगा जिसे रहमान (अल्लाह) आज्ञा देगा और सह़ीह़ बात करेगा।
वह दिन निःसंदेह होना ही है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर (जाने का) ठिकाना बना ले।[1]
हमने तुम्हें समीप यातना से सावधान कर दिया, जिस दिन इन्सान अपना करतूत देखेगा और काफ़िर (विश्वासहीन) कहेगा कि काश मैं मिट्टी हो जाता![1]